चलो उठो अब एक नए सफ़र पर चलने का दिन आया है
हिसाब चुकता करो सबके, अलविदा केहने का दिन आया है
भर लो अपनी पोटली उन चीज़ों से जो काम आएंगी सफ़र में
समेट लो उन पलों को जो रात में तकिये पे याद आयेंगे
बंद करलो उस रिश्ते को दिल की सीपी में
जो अंजाम तक न जा पाया
करो फिर मिलने के वादे उनसे जिनसे बिछड कर आँखों में आंसू आये
भर लो मुस्कुराहटें जेबों में उसके रुखसार से
और भर लो आँखें उसके दीदार के तसव्वुर से
बंद करलो उन रिश्तों के खातों को जिनसे
कई दिन तक कोई लेन देन नहीं था
खामोशिया ठूस लो जेब में
जिस्म पर मल दो, वोह सपने जो सबने मिलके देखे थे
पोटली लादो पीठ पर और चलो अब
रिश्ते रोकेंगे तुम्हे बोहोत पर छुड़ाओ हात उनसे और बढ़ो अपनी राह पर
ज़िन्दगी रिश्ते नहीं समझती ज़िन्दगी चलती रहती है, तुम भी चलो अब
हिसाब चुकता करो सबके, अलविदा केहने का दिन आया है
भर लो अपनी पोटली उन चीज़ों से जो काम आएंगी सफ़र में
समेट लो उन पलों को जो रात में तकिये पे याद आयेंगे
बंद करलो उस रिश्ते को दिल की सीपी में
जो अंजाम तक न जा पाया
करो फिर मिलने के वादे उनसे जिनसे बिछड कर आँखों में आंसू आये
भर लो मुस्कुराहटें जेबों में उसके रुखसार से
और भर लो आँखें उसके दीदार के तसव्वुर से
बंद करलो उन रिश्तों के खातों को जिनसे
कई दिन तक कोई लेन देन नहीं था
खामोशिया ठूस लो जेब में
जिस्म पर मल दो, वोह सपने जो सबने मिलके देखे थे
पोटली लादो पीठ पर और चलो अब
रिश्ते रोकेंगे तुम्हे बोहोत पर छुड़ाओ हात उनसे और बढ़ो अपनी राह पर
ज़िन्दगी रिश्ते नहीं समझती ज़िन्दगी चलती रहती है, तुम भी चलो अब
No comments:
Post a Comment